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क्या PPF में पैसा लगाने वालों को लगेगा झटका? कम हो सकती हैं ब्याज दरें

PPF की ब्याज दरों में सालों से उतार-चढ़ाव देखा गया है. फिलहाल यह दर 7.1% प्रति वर्ष है और यह अप्रैल 2020 से अब तक जस की तस बनी हुई है. ब्याज की गणना हर महीने होती है लेकिन इसे सालाना आधार पर खाते में जोड़ा जाता है.

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस साल रेपो रेट में 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है, जिस वजह से ये अटकलें लगाई जा रही हैं कि जुलाई में होने वाली अगली समीक्षा में पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) की ब्याज दर 7% से नीचे जा सकती है. कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकारी बॉन्ड की गिरती यील्ड और ब्याज दर तय करने के फार्मूले इस कटौती की ओर इशारा कर रहे हैं, वहीं कुछ का मानना है कि राजनीतिक और व्यवहारिक कारणों से सरकार इतनी जल्दी कोई बड़ा फैसला नहीं लेगी.
अभी PPF की ब्याज दर 7.10% है, जो कि 10 साल के सरकारी बॉन्ड की औसत यील्ड से जुड़ी होती है. श्यामला गोपीनाथ कमेटी के फार्मूले के अनुसार, PPF की ब्याज दरें 10 साल के सरकारी बॉन्ड की औसत यील्ड से 25 बेसिस प्वाइंट ज्यादा होनी चाहिए. अभी यह यील्ड करीब 6.325% पर है, जिससे हिसाब लगाकर PPF की दर लगभग 6.575% बनती है यानी मौजूदा दर से करीब 52.5 बेसिस प्वाइंट कम.

अभी निवेश करने पर नहीं होगा नुकसान

Scripbox के फाउंडर और सीईओ अतुल शिंगल ने कहा, RBI द्वारा 2025 में रेपो रेट में कुल 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती के बाद अब सभी की नजर स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की जुलाई तिमाही की ब्याज दरों पर है. उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि वे संभावित कटौती से पहले मौजूदा दरों पर निवेश कर लें.
इस ब्याज दर में कटौती की चर्चा RBI की मौद्रिक नीति में “नरम रुख” (Accommodative Policy) के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है. इस साल RBI ने फरवरी और अप्रैल में 25-25 बेसिस प्वाइंट और जून में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है, जिससे रेपो रेट 6.5% से घटकर 5.5% हो गया है. इसी के साथ 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड भी जनवरी में 6.779% से घटकर जून में 6.247% हो गई है.हालांकि, सभी लोग यह नहीं मानते कि सरकार PPF की ब्याज दरों में तुरंत कटौती करेगी.

लीग से हटकर सरकार कर सकती है फैसला

BankBazaar.com के CEO अधिल शेठ्टी ने कहा, श्यामला गोपीनाथ कमेटी का फार्मूला सिर्फ एक सुझाव है, यह बाध्यकारी नहीं है, और सरकार पहले भी इस फार्मूले से अलग फैसले ले चुकी है. उन्होंने कहा कि PPF एक ऐसा सेविंग विकल्प है जो खासकर मिडल क्लास और रिटायरमेंट प्लानिंग करने वालों में काफी लोकप्रिय है. ऐसे में अगर ब्याज दरों में अचानक कटौती की गई, तो लोग औपचारिक बचत चैनल छोड़ सकते हैं या ज्यादा जोखिम वाले विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे वित्तीय समावेशन (financial inclusion) को नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए सरकार धीरे-धीरे ब्याज दर घटा सकती है.

PPF की ब्याज दरों का इतिहास

PPF की ब्याज दरों में सालों से उतार-चढ़ाव देखा गया है. फिलहाल यह दर 7.1% प्रति वर्ष है और यह अप्रैल 2020 से अब तक जस की तस बनी हुई है. ब्याज की गणना हर महीने होती है लेकिन इसे सालाना आधार पर खाते में जोड़ा जाता है. 1986 से 1999 तक PPF पर सबसे ऊंची ब्याज दर 12% थी। इसके बाद यह धीरे-धीरे घटती गई . 2000 में 9.5%, 2003 में 8% और 2017 में 7.9% हो गई थी.
आज की 7.1% की दर भले ही पहले जैसी ऊंची न हो, लेकिन यह अब भी टैक्स-फ्री और सरकारी गारंटी वाली रिटर्न देती है, जो लंबे समय के लिए निवेश करने वाले और जोखिम से बचने वाले लोगों के लिए आकर्षक विकल्प है. नई ब्याज दरों की घोषणा जून के अंत तक होने की उम्मीद है, जो 1 जुलाई से लागू होंगी.

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