कांग्रेस ने इंदिरा गांधी के वक्त इमरजेंसी का सच बताया है. कांग्रेस ने कहा है कि इमरजेंसी के बाद 1977 में चुनाव हुए. संसद में मोरारजी देसाई सरकार आई तो विपक्ष में रहकर इंदिरा गांधी ने उसका समर्थन किया और इमरजेंसी की भूल स्वीकार की. मगर उस वक्त किस किसने ने इंदिरा गांधी को चिट्ठी लिखकर इमरजेंसी को सही ठहराया था.
आपातकाल को लेकर बीजेपी लगातार कांग्रेस पर हमलावर रही है. 25 जून को आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर बीजेपी इसे संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाई. बीजेपी आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय बताती है. बीजेपी का कहना है कि इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाकर जो अत्याचार किया था उसको देश नहीं भूल सकता. इसी आपातकाल पर कांग्रेस का जवाब आया है.
कांग्रेस ने इंदिरा गांधी के वक्त इमरजेंसी का सच बताया है. कांग्रेस ने कहा है कि इमरजेंसी के बाद 1977 में चुनाव हुए. इमरजेंसी क्लोज आर्टिकल 352(1) के तहत प्रस्ताव संसद में मोरारजी देसाई सरकार आई तो विपक्ष में रहकर इंदिरा गांधी ने उसका समर्थन किया और इमरजेंसी की भूल स्वीकार की. हालांकि, बाद में सोनिया और राहुल ने इसे गलती माना.
RSS ने इमरजेंसी को सही ठहराया- कांग्रेस
मगर उस वक्त आरएसएस के वरिष्ठ बाला साहेब देवरस ने इंदिरा गांधी को कई खत लिखकर इमरजेंसी को सही ठहराया. मिलने की गुजारिश की, इंदिरा नहीं मिलीं तो विनोबा भावे से कहा कि टाइम मांगने पर भी इंदिरा मिल नहीं रहीं. उस वक्त शिवसेना सुप्रीमो, हिन्दू ह्रदय सम्राट बाला साहेब ठाकरे ने इमरजेंसी और इंदिरा का समर्थन किया.
साथ ही कांग्रेस विरोधी विचारक ओशो उर्फ आचार्य रजनीश ने इमरजेंसी को लेकर इंदिरा का समर्थन किया. इंदिरा ने कहा कि उस वक्त सेना और पुलिस को सरकार के खिलाफ बगावत के लिए उकसाया गया. ये बयानों में जाहिर है. देश न टूटे इसलिए करना पड़ा. फिर 1980 के आमचुनाव में 353 सीटों के साथ इंदिरा की सत्ता में वापसी हुई, दो तिहाई बहुमत से सिर्फ 7 सीट कम. यह आपातकाल के बाद उनके लिए एक जबरदस्त उलटफेर था.
देश में इस समय अघोषित आपातकाल है- खरगे
इमरजेंसी के 50 साल पूरा होने पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि आज हम देश में अघोषित इमरजेंसी को झेल रहे हैं. मोदी सरकार अपनी सारी नाकामियों पर पर्दा डालने के लिए रोज नए कार्यक्रम और नारे देती है. देश में इस समय अघोषित आपातकाल है. सरकार संविधान और संसद दोनों का ही सम्मान नहीं करती है. भाजपा हमारी ‘संविधान बचाओ यात्रा’ से घबरा गई है.
उन्होंने कहा कि जो लोग अपने कार्यकाल में कुछ नहीं कर सके, जिनके पास बेरोजगारी, महंगाई और नोटबंदी के मुद्दों पर कोई जवाब नहीं है. वे झूठ को छिपाने के लिए आज आपातकाल के 50 साल पूरे होने का नाटक कर रहे हैं. ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मना रहे हैं.
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