प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किला से आरएसएस की तारीफ की. इसी को लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उनकी आलोचना की. ओवैसी ने कहा, आरएसएस की तारीफ करना स्वतंत्रता संग्राम का अपमान है. चीन हमारा सबसे बड़ा बाहरी खतरा बना हुआ है, लेकिन इससे भी बड़ा खतरा अंदर है- वो नफरत और बंटवारा जो संघ परिवार फैला रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किला से तिंरगा फहराया. पीएम ने इस दौरान पूरे देश को संबोधित किया. अपने संबोधन में पीएम ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का भी जिक्र किया और संघ की तारीफ की. अब इसी को लेकर विपक्ष ने निशाना साधना शुरू कर दिया है. AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसकी आलोचना की.
असददुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर कहा, स्वतंत्रता दिवस की स्पीच में आरएसएस की तारीफ करना स्वतंत्रता संग्राम का अपमान है. आरएसएस और इसके वैचारिक सहयोगी ब्रिटिशों के पैदल सैनिक के रूप में काम करते थे. उन्होंने कभी स्वतंत्रता की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया. वो गांधी से उतनी नफरत करते थे जितना कभी उन्होंने ब्रिटिशों का विरोध नहीं किया.
ओवैसी ने की RSS की आलोचना
ओवैसी ने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए दी. साथ ही उन्होंने कहा, पीएम ने हमें एक बार फिर याद दिला दिया है कि असल इतिहास पढ़ना और देश के असल नायकों का सम्मान करना कितना जरूरी है. अगर हम ऐसा नहीं करेंगे, तो वो दिन दूर नहीं जब कायरता को हमें बहादुरी के रूप में बेचा जाएगा. ओवैसी ने आरएसएस की आलोचना करते हुए कहा, आरएसएस हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरित करने वाले समावेशी राष्ट्रवाद के मूल्यों को नकारता है.
RSS को बताया चीन से भी खतरनाक
हिंदुत्व की विचारधारा बहिष्कार में विश्वास करती है और हमारे संविधान के मूल्यों के विपरीत है. मोदी नागपुर जाकर एक स्वयंसेवक के रूप में आरएसएस की तारीफ कर सकते थे, उन्हें ऐसा प्रधानमंत्री के रूप में लाल किले से क्यों करना पड़ा? चीन हमारा सबसे बड़ा बाहरी खतरा बना हुआ है, लेकिन इससे भी बड़ा खतरा अंदर है — वह नफरत और बंटवारा जो संघ परिवार फैला रहा है. अपनी आजादी को सच्चे मायनों में सुरक्षित रखने के लिए हमें ऐसी सभी ताकतों को हराना होगा.
CPI-M का भी रिएक्शन आया सामने
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने शुक्रवार को कहा कि पीएम मोदी का स्वतंत्रता दिवस के भाषण में आरएसएस की तारीफ करना बेहद अफसोसनाक है. उन्होंने आरएसएस को संदिग्ध ऐतिहासिक रिकॉर्ड वाला संगठन बताया. देश को 79वें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए सीपीआई(एम) के महासचिव एम.ए. बेबी ने कहा कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगाया गया था.
बेबी ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट किया, 79वें स्वतंत्रता दिवस पर मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं. उपनिवेशी शासन से भारत की आज़ादी की यात्रा लंबी और मुश्किल थी. उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम ने आरएसएस की तारीफ कर हमारे शहीदों की याद का अपमान किया है.
“RSS का इन संघर्षों में कोई योगदान नहीं”
CPI-M के नेता ने कहा, यह बेहद अफसोसजनक है कि पीएम मोदी ने लाल किले से अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में आरएसएस की तारीफ की. उन्होंने आरएसएस को लेकर कहा, यह एक ऐसा संगठन है जिसका ऐतिहासिक रिकॉर्ड संदिग्ध है. एक ऐसा संगठन जिसका इन संघर्षों में कोई भी योगदान नहीं था और जिसने लगातार धार्मिक आधार पर राष्ट्रीय एकता को कमजोर करने की कोशिश की है. इतिहासकारों ने साम्प्रदायिक दंगों और अन्य हिंसा को भड़काने में इसकी भूमिका दर्ज की है. खास बात यह है कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद, जो हमारे स्वतंत्रता संग्राम के नेता थे, इस संगठन पर प्रतिबंध लगाया गया था.
बेबी ने कहा, इस स्वतंत्रता दिवस पर आरएसएस की तारीफ करके पीएम मोदी ने हमारे शहीदों और स्वतंत्रता आंदोलन की भावना का अपमान किया है. यह बेहद अस्वीकार्य और शर्मनाक है.
पीएम ने RSS को लेकर क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आरएसएस की तारीफ करते हुए कहा, आरएसएस का इतिहास गौरवपूर्ण है. साथ ही उन्होंने इसे दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ कहा और इसके सभी स्वयंसेवकों की राष्ट्र सेवा के लिए सराहना की. पीएम मोदी ने कहा, आज से 100 साल पहले एक संगठन का जन्म हुआ था. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ. व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण के संकल्प को लेकर 100 साल तक संघ ने काम किया.
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